पहलवान आंदोलन के 'फायदे-नुकसान' का त्रिवर्षीय बही-खाता
जब जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर देश के दिग्गज पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला, तो शुरू में यह आंदोलन महिला सम्मान और न्याय की लड़ाई के रूप में दिखा, लेकिन आज तीन साल बीतते-बीतते यह पूरी तरह से सिद्ध हो चुका है कि यह आंदोलन व्यक्तिगत लाभ, राजनीतिक महत्वाकांक्षा और 'पब्लिक सेंटीमेंट' के साथ खेलने का ही जरिया था। जिस तरह केजरीवाल और उनकी टीम ने 'India Against Corruption' के जरिए सत्ता की सीढ़ी चढ़ी, ठीक वैसा ही कुछ यहाँ भी देखने को मिला। खेल की दुनिया से निकलकर इन पहलवानों ने टीवी की चकाचौंध और राजनीति के गलियारों में अपनी जगह पक्की कर ली, जबकि ह्रास हुआ कुश्ती का और युवा खिलाड़ियों के करियर का। इस आंदोलन की क्रोनोलॉजी को देखें तो जुलाई 2023 एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जब IOA की एड-हॉक कमेटी ने विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया को 'ट्रायल से छूट' देकर एशियाई खेलों के लिए "सीधे प्रवेश" दे दिया। इस फैसले ने साफ कर दिया कि विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा फायदा इन पहलवानों को 'बिना मेहनत' चयन के ...